22/02/2026
अधूरी मोहब्बत का विजेता
राहुल एक छोटे से गाँव का लड़का था।
घर की हालत ठीक नहीं थी, पिता मजदूर और माँ सिलाई का काम करती थीं।
राहुल के पास सपने बहुत थे, लेकिन जेब खाली थी।
कॉलेज में उसकी मुलाकात हुई सिया से।
सिया हँसमुख थी, समझदार थी, और राहुल के सपनों को समझती थी।
धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती गहरी हो गई।
राहुल को महसूस होने लगा कि वो सिया से प्यार करने लगा है।
लेकिन उसी कॉलेज में था अर्जुन।
अर्जुन अमीर परिवार से था, स्मार्ट था, और सिया का बचपन का दोस्त भी।
अर्जुन भी सिया से प्यार करता था।
राहुल ने कभी अपने दिल की बात नहीं कही।
उसे लगता था कि पहले कुछ बन जाए, फिर प्यार की बात करेगा।
वो दिन-रात मेहनत करता, पढ़ता, और अपने सपनों के पीछे भागता।
इधर अर्जुन ने सिया को प्रपोज कर दिया।
सिया कन्फ्यूज थी…
एक तरफ बचपन का साथ, दूसरी तरफ राहुल की खामोश परवाह।
राहुल ने सब कुछ देख कर भी कुछ नहीं कहा।
उसने अपने दिल को समझा लिया —
“अगर किस्मत में होगा तो मिलेगा…”
घर की जिम्मेदारियाँ बढ़ गईं।
राहुल शहर चला गया।
छोटे-छोटे काम किए, कई बार भूखा सोया।
लोगों ने मज़ाक उड़ाया, कहा —
“तुमसे नहीं होगा।”
लेकिन राहुल नहीं रुका।
वो गिरा, संभला, फिर चला।
कई सालों की मेहनत के बाद उसने अपनी कंपनी खड़ी कर दी।
आज लोग उसे “सफल बिजनेसमैन” कहते थे।
एक दिन किसी इवेंट में उसकी मुलाकात फिर सिया से हुई।
सिया अब अर्जुन की पत्नी थी।
उसकी आँखों में खुशी थी… और हल्की सी कसक भी।
सिया ने मुस्कुराकर कहा —
“मुझे पता था तुम बहुत आगे जाओगे।”
राहुल भी मुस्कुराया,
लेकिन उसके अंदर एक तूफान था।
वो जीत गया था…
गरीबी से, हालातों से, दुनिया से।
लेकिन प्यार की जंग हार गया था।
उस रात राहुल ने आसमान की तरफ देखा और कहा —
“शायद मेरी किस्मत में कामयाबी थी, मोहब्बत नहीं…”
वो आज भी लोगों के लिए मिसाल है।
उसकी कहानी स्ट्रगल और सफलता की है।
लेकिन उसके दिल में एक कोना आज भी खाली है।
कभी-कभी जिंदगी आपको सब कुछ देती है…
बस वो नहीं देती,
जिसकी आपको सबसे ज्यादा जरूरत होती है।