Khushal Kheti Khushal Kissan खुशाल खेती खुशाल किसान

  • Home
  • India
  • Ludhiana
  • Khushal Kheti Khushal Kissan खुशाल खेती खुशाल किसान

Khushal Kheti Khushal Kissan खुशाल खेती खुशाल किसान Khushal Kheti Khushal Kissan is comprehensive online business directory for all agriculture concerned. We are directly touch with farmes and serving

16/06/2017

ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋ ਹਦਾਇਤਾ ਅਨੁਸਾਰ 15 ਜੂਨ ਤੋਂ ਝੋਨੇ ਲੁਆਈ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਹੈ ਤੇ ਹੁਣ ਕਿਸਾਨ ਵੀਰ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਤੋਂ ਲੱਗਣ ਵਾਲੀਆ ਬਿਮਾਰੀਆ ਤੋ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਪਨੀਰੀ ਦੀ ਸੋਧ ਕਰਨ । ਯੁਨੀਵਰਸਿਟੀ ਅਨੁਸਾਰ ਪਨੀਰੀ ਦੀ ਸੋਧ ਲਈ 1 ਏਕੜ ਦੀ 1 ਕਿਲੋ ਜੀਵਾਣੂ ਖਾਦ ਨੁੰ 30 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਲਓ । ਪਨੀਰੀ ਦੀਆਂ ਜੜਾਂ ਨੂੰ 45 ਮਿੰਟ ਲਈ ਘੋਲ ਵਿੱਚ ਡਬੋ ਕੇ ਰੱਖੋ ਤੇ ਜਲਦੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾ ਦਿਉ।
पंजाब सरकार की तरफ से हदायतों के अनुसार 15 जून से धान की रोपाई शुरू हो चुकी है और अब किसान भाई पनीरी को मिट्टी से लगने वाली बीमारियों से बचाने के लिए पनीरी का उपचार करें। यूनिवर्सिटी के अनुसार पनीरी के उपचार के लिए 1 एकड़ की 1 किलो जीवाणु खाद को 30 लीटर पानी में घोल दें। पनीरी की जड़ों को 45 मिनट के लिए घोल में डुबो कर रखें और जल्दी खेत में लगा दें

16/06/2017

0% GST Rates Items – गेहूं, चावल, दूसरे अनाज, आटा, मैदा, बेसन, चूड़ा, मूड़ी (मुरमुरे), खोई, ब्रेड, गुड़, दूध, दही, लस्सी, खुला पनीर, अंडे, मीट-मछली, शहद, ताजी फल-सब्जियां, प्रसाद, नमक, सेंधा/काला नमक, कुमकुम, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां, पान के पत्ते, गर्भनिरोधक, स्टांप पेपर, कोर्ट के कागजात, डाक विभाग के पोस्टकार्ड/लिफाफे, किताबें, स्लेट-पेंसिल, चॉक, समाचार पत्र-पत्रिकाएं, मैप, एटलस, ग्लोब, हैंडलूम, मिट्टी के बर्तन, खेती में इस्तेमाल होने वाले औजार, बीज, बिना ब्रांड के ऑर्गेनिक खाद, सभी तरह के गर्भनिरोधक, ब्लड, सुनने की मशीन।
5% GST Rates Items – ब्रांडेड अनाज, ब्रांडेड आटा, ब्रांडेड शहद, चीनी, चाय, कॉफी, मिठाइयां, खाद्य तेल, स्किम्ड मिल्क पाउडर, बच्चों के मिल्क फूड, रस्क, पिज्जा ब्रेड, टोस्ट ब्रेड, पेस्ट्री मिक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन फल-सब्जियां, पैकिंग वाला पनीर, ड्राई फिश, न्यूजप्रिंट, ब्रोशर, लीफलेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस, झाडू, क्रीम, मसाले, जूस, साबूदाना, जड़ी-बूटी, लौंग, दालचीनी, जायफल, जीवन रक्षक दवाएं, स्टेंट, ब्लड वैक्सीन, हेपेटाइटिस डायग्नोसिस किट, ड्रग फॉर्मूलेशन, क्रच, व्हीलचेयर, ट्रायसाइकिल, लाइफबोट, हैंडपंप और उसके पार्ट्स, सोलर वाटर हीटर, रिन्यूएबल एनर्जी डिवाइस, ईंट, मिट्टी के टाइल्स, साइकिल-रिक्शा के टायर, कोयला, लिग्नाइट, कोक, कोल गैस, सभी ओर (अयस्क) और कंसेंट्रेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस।
12% GST Rates Items – नमकीन, भुजिया, बटर ऑयल, घी, मोबाइल फोन, ड्राई फ्रूट, फ्रूट और वेजिटेबल जूस, सोया मिल्क जूस और दूध युक्त ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन मीट-मछली, अगरबत्ती, कैंडल, आयुर्वेदिक-यूनानी-सिद्धा-होम्यो दवाएं, गॉज, बैंडेज, प्लास्टर, ऑर्थोपेडिक उपकरण, टूथ पाउडर, सिलाई मशीन और इसकी सुई, बायो गैस, एक्सरसाइज बुक, क्राफ्ट पेपर, पेपर बॉक्स, बच्चों की ड्रॉइंग और कलर बुक, प्रिंटेड कार्ड, चश्मे का लेंस, पेंसिल शार्पनर, छुरी, कॉयर मैट्रेस, एलईडी लाइट, किचन और टॉयलेट के सेरेमिक आइटम, स्टील, तांबे और एल्यूमीनियम के बर्तन, इलेक्ट्रिक वाहन, साइकिल और पार्ट्स, खेल के सामान, खिलौने वाली साइकिल, कार और स्कूटर, आर्ट वर्क, मार्बल/ग्रेनाइट ब्लॉक, छाता, वाकिंग स्टिक, फ्लाईएश की ईंटें, कंघी, पेंसिल, क्रेयॉन।
18% GST Rates Items – हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉर्न फ्लेक्स, पेस्ट्री, केक, जैम-जेली, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड, शुगर कन्फेक्शनरी, फूड मिक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स कंसेंट्रेट, डायबेटिक फूड, निकोटिन गम, मिनरल वॉटर, हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉयर मैट्रेस, कॉटन पिलो, रजिस्टर, अकाउंट बुक, नोटबुक, इरेजर, फाउंटेन पेन, नैपकिन, टिश्यू पेपर, टॉयलेट पेपर, कैमरा, स्पीकर, प्लास्टिक प्रोडक्ट, हेलमेट, कैन, पाइप, शीट, कीटनाशक, रिफ्रैक्टरी सीमेंट, बायोडीजल, प्लास्टिक के ट्यूब, पाइप और घरेलू सामान, सेरेमिक-पोर्सिलेन-चाइना से बनी घरेलू चीजें, कांच की बोतल-जार-बर्तन, स्टील के ट-बार-एंगल-ट्यूब-पाइप-नट-बोल्ट, एलपीजी स्टोव, इलेक्ट्रिक मोटर और जेनरेटर, ऑप्टिकल फाइबर, चश्मे का फ्रेम, गॉगल्स, विकलांगों की कार।
28% GST Rates Items – कस्टर्ड पाउडर, इंस्टैंट कॉफी, चॉकलेट, परफ्यूम, शैंपू, ब्यूटी या मेकअप के सामान, डियोड्रेंट, हेयर डाइ/क्रीम, पाउडर, स्किन केयर प्रोडक्ट, सनस्क्रीन लोशन, मैनिक्योर/पैडीक्योर प्रोडक्ट, शेविंग क्रीम, रेजर, आफ्टरशेव, लिक्विड सोप, डिटरजेंट, एल्युमीनियम फ्वायल, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, डिश वाशर, इलेक्ट्रिक हीटर, इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट, प्रिंटर, फोटो कॉपी और फैक्स मशीन, लेदर प्रोडक्ट, विग, घड़ियां, वीडियो गेम कंसोल, सीमेंट, पेंट-वार्निश, पुट्टी, प्लाई बोर्ड, मार्बल/ग्रेनाइट (ब्लॉक नहीं), प्लास्टर, माइका, स्टील पाइप, टाइल्स और सेरामिक्स प्रोडक्ट, प्लास्टिक की फ्लोर कवरिंग और बाथ फिटिंग्स, कार-बस-ट्रक के ट्यूब-टायर, लैंप, लाइट फिटिंग्स, एल्युमिनियम के डोर-विंडो फ्रेम, इनसुलेटेड वायर-केबल।

18/03/2017
24/02/2017
13/08/2016

Use of milking machine
Advantages: - Saving of labour expenses. Reduction of dependency on skilled farm workers. (This is the point why all dairy workers oppose a machine milking method) Enables rearing of larger herd strength. 3-4 times faster than hand milking. Increase in the milk yield. Increase in the quality of milk. Reduces stress throughout the lactation by creating good milking routines.
Disadvantages: - Some of the older cows which are accustomed to hand milking may not adjust to machine milking. Standby power supply is essential. High initial investment and training of staff. Negligence in following the strict cleaning procedures would lead to severe contamination and higher incidence of mastitis. (This is the point col. Sahib mentioned earlier but cause is not machine itself) Greater water requirement for cleaning of equipment. Prompt service and availability of spares is essential.
If someone can add more points please do.

13/08/2016

12/08 19:37] G2 Ashish V: में दो दिन पहले नागपुर (महा) दादा जी के यह गया था उनका सारा काम सब्जी का हे में जब उनके खेत में गया तो मेरा सबसे पहला एक ही प्रशन यही हा की आप इतने सालो से सब्जी का काम कर रहे हो और आप के खेत में मल्चिंग नही हे क्या कारण हे तो अंकल बोले मेरे को जमीन खराब थोड़ी करना हे
[12/08 19:37] G2 Ashish V: मेने कहा वो कैशे?
[12/08 19:45] G2 Ashish V: उनका कहना था की में आज मल्चिंग लगता हु तो वो जमीन एक से डेढ़ साल के लिए ढक जायेगी और जमीन को जो सबशे जरूरी चीज वो हे सूर्य की रौशनी हवा पानी बारिश का ये तीनो चीज हम रोक रहे हे फिर दो सालो बाद फिर मल्चिंग जमीन को पत्तो से कचरों से जो खाद भी मिलता हे वो कहा जायेगा
[12/08 19:57] G2 Ashish V: मेरी बात को 32 लोगो ने पड़ा हे जवाब दो सहमत हो या नही
[12/08 19:57] +91 99263 62532: हाँ भैया आपकी बात और दादाजी के काम बिलकुल सही है ।।।
[12/08 19:58] +91 99263 62532: मल्चिंग और खरपतवार नाशक में कोई अंतर नहीं है ।खरपतवार नाशक से मल्चिंग फिर भी कुछ ठीक है ।।।।
[12/08 19:59] G3: बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है
आज के लिये हम फायदा तो उठा रहे है । लेकिन भविष्य मे इसके क्या परिणाम हो सकते है ,
इस बारे मे कोई विशेषज्ञ सही जानकारी दे कृपया
[12/08 20:00] +91 99263 62532: खेतो में घांस खरपतवार और फसल के पत्तो से बहुत ही बड़ियाँ खाद प्राप्त होती है ।।
[12/08 20:00] +91 97543 25242: मल्चिंग एक वस्तु नहीं एक पद्दति है, दादाजी ठीक बोल रहे हैं उनका अनुभव है हम केवल छोटा काम करते हैं, लेकिन कुछ और भी कारण है मल्च करने के पर है प्रकृति से छेड़छाड़।
[12/08 20:00] +91 94248 66766: बिना mulching के उत्पादन 60से 70%तक घटता है और शुरुआत में बीमारी से बचत होती है ।पानी की 60%और खाद की 40%बचत । 2से3 फसल या 8से 14 महीनो तक ना हलना बखरना बचत है रोटवेटो निंदाई बचती है।हम ने शुरुआत में एक लाइन तरबूज में बिना mulching के छोड़े थे malching का तरबूज निकल गया और बिना मल्चिंग को कच्चे में ही उखाड़ना पड़ा 15 से 20 दिन पहले फसल आ जाती है ।रंजीत भाई ने दोनों लगाया है अभी से अंतर दिख रहा है उत्पादन में 50से 70%तक का अंतर आ सकता है
[12/08 20:02] G2 Ashish V: आप की बात से तो सहमत हे पर भविष्य का क्या होगा
[12/08 20:02] +91 99263 62532: लंबे समय के बाद परिणाम कुछ और ही आएंगे भैया ।।आज जरूर फायदा दिख रहा होगा ।पर कल नुक्सान दायीं ही रहेगा
[12/08 20:03] G3: राकेश भैय्या सही बात कही
ये मल्चिंग का लाभ है
परंतु भविष्य के परिणाम पर कुछ रौशनी डालिये
या फिर ऐसा करे के खेत बदल बदल कर मल्चिंग का उपयोग करे
[12/08 20:04] +91 97543 25242: नुकसान केवल एक है, जमीन पानी नहीं सोखेगी, उसके अलावा सब फायदे हैं
[12/08 20:05] +91 99263 62532: मल्चिंग क्यों लगाई जाती है।।।खरपतवार नियंत्रण के लिए ही न ।।।
[12/08 20:06] +91 94248 66766: भाई मैने 5 एकर में सन और ढेंच बोया है रंजीत भाई और साथियों ने देखा है 3 फसल तरबूज की लेने के बाद 1.5से 2 महीने का rest और बहुत ही उपयोगी हरी खाद
[12/08 20:07] +91 99263 47373: मलिचंग का विकल्प बडे पत्ते हो सकते है मोसम और समय साथ अगर सही लगाया जाये
[12/08 20:10] +91 94248 66766: हम या तो खेत खाली छोड़ते है या मल्चिंग पर ही खेती करते हैं ।अभी भी मेरा खेत में 10 एकर में मल्चिंग बिछी है 18 aug के बाद ही तरबूज और खीरा लगेगा 10 सितम्बर के बाद टमाटर लगेगा
[12/08 20:13] G3: जैसे नमी ज्यादा समय तक बनी रहती
वेट के अंदर से वाष्पीकरण होकर पानी गैस के रूप मे बाहर निकलने का प्रयास करता है और पन्नी से टकरा कर पुनः लौट जाता है
इस प्रक्रिया मे वेट की मिट्टी नरम हो जाती है
और धूप के सीधे संपर्क से बच कर खाद भी ज्यादा असर करती होगी
[12/08 20:16] +91 94248 66766: जो खाद पानी के कारन जड़ क्षेत्र से नीचे चला जाता है वो वाष्पीकृत हो कर वापस जड़ क्षेत्र में आ जाता है
[12/08 20:23] +91 97543 25242: सूर्य पृकाश व अधिक बारीश से जमीन के अंदरूनी मौसम मे बदलाव आता है, एसा होने पर ह्युमिडीटी मे बदलाव आता है, पौधा समझे इससे पहले उसकी जड़ सडने लगती है, जड़ सडन एक स्वभाविक किृया है पर कौन सी जड़, अगर भोजन वाली सडे तो कोई बात नहीं लेकिन स्टंब वाली सड़ जाए तो पौधा मर जाता है, और उस जड़ पर फंगस व अन्य कीट हावी हो जाते हैं जो दूसरे पौधे को भी नष्ट कर देते हैं,एसा सितंबर, फरवरी ,जून मे ज्यादा होता है, क्योंकि इन महीनो मे हमारे मौसम मे बड़े बदलाव आते हैं,अगर आपकी फसल ज्यादा सेंसेटिव है तो मल्चिंग जरूरी है क्योकि यह जमीन का तापमान व ह्यूमिडीटी मेनेज करती है।
[12/08 20:37] G3: सही कहा आपने
मल्चिंग की दो कतारों के बीच भी जगह बचती ही है,
और राकेश भैय्या वाला तरीका भी बेस्ट है लाखों के मुनाफे के बाद जमीन को 2 महिने आहार के साथ आराम भी दे सकते है
[12/08 20:38] G3: ये बहुत अच्छा है
अगले वर्षों मे हम सोयाबीन की बुआई के तरीको मे बदलाव कर के इसे अपनाए जरूर..
[12/08 20:42] G10: Plastic mulching उपयोग करे खेत बदलबल कर हमें मिक्षित खेती करना है जो हर दिशा मे best हो उतपादन भी जमीन कि दशा भि लागत कम भी एव बिना जहर का उतपादन
[12/08 20:46] G10: हा हमें लगता है तो.अतः मे कटोल मेनर मे जहर भी डाल सकते है लेकिन मेरा विशवास एव 20 % गत वर्ष मेरी जैविक टमाटर कि सफलता एव 100 % जो कररहे उनका विशवास है कि जैविक करगे तो बिमारी नही आयेगी
[12/08 20:47] G3: बदलाव का पहला कदम है निरीक्षण
जहां भी जानकारी मिल सके पहुंच जाओ
मै राकेश भैय्या और राजू भाई जामली के खेत मे बहुत देरी से गया
इसका मुझे मलाल है..

26/07/2016

किसानों का गुरु बन रहा ये नया 'एप'
By अरविन्द शुक्ला on 2016-07-24  
लखनऊ। खेत में कब और कौन सी फसल लगाएं जिससे मुनाफा ज्यादा हो? किसी सरकारी योजना का लाभ कैसे मिल सकता है? ऐसे तमाम सवालों को लेकर परेशान रहने वाले किसानों के लिए इफको का कॉल सेंटर और ऐप ‘गुरु’ बन रहा है।
“पूर्वांचल के रहने वाले एक किसान के खेत में काफी जलभराव हो जाता था, उसे समझ में नहीं आ रहा था धान की कौन सी फसल लगाए। परेशान किसान ने इफको के किसान संचार में फोन किया तो जहां उसकी समस्या कुछ ही मिनटों में सुलझ गई। हमने उन्हें बताया कि स्वर्णा, एमटीयू-70 और जलप्रिया जैसी धान की किस्मे लगाई जा सकती हैं। अब हम लोगों ने एक एप भी लॉन्च किया है, जहां किसान अपनी किसी भी समस्या के बारे में जानकारी ले सकते हैं।” मनोज जैन, संदेश प्रभारी, इफको संचार बताते हैं।

इफको ने इस ऐप को पिछले वर्ष लॉन्च किया गया था। इसके माध्यम से किसान मौसम, मंडी भाव के साथ ही खेती से संबंधित हर जानकारी ले सकते हैं। मनोज आगे बताते हैं, “हम सिर्फ खेती बाड़ी से संबंधित जानकारी ही नहीं देते बल्कि अगर कोई किसान अपने खेत से ही सामान बेचना चाहे तो उसकी जानकारी अपने नंबर के साथ ऐप में फीड कर सकते है, उसके बाद रजिस्टर्ड कारोबारी खुद किसान से संपर्क का उसका माल उचित मूल्य पर खरीद लेते हैं।“
इफको का कहना है कि उनकी कोशिश है कि किसानों को किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए भटकना न पड़े, जानकारी के अभाव में गलत फसल न बाएं। मनोज बताते हैं, “यूपी में अब तक ऐप को 10 लाख लोग डाउनलोड कर चुके हैं। हमारे निशुल्क किसान सलाह केंद्र 534351 पर रोजाना 300-400 किसानों को फोन आते हैं। लेकिन ये सेवा उन किसानों के लिए ही फ्री जिनके पर ग्रीन सिम धारक हो, बाकी के लिए को इसके लिए पैसे खर्च करने पड़ते है।”
इफको का किसान संचार पिछले दस वर्षों से कार्यरत है, जिसके तहत रजिस्��

25/07/2016

1. फलो से संबंधित पढ़ाई को “Pomology” कहा जाता है।
2. अमेरिका की दुकानो पर जो सेब बेचा जाता है वह एक साल पुराना होता है।
3. क्या आप जानते है दुनिया का सबसे Produce होने वाला फल टमाटर है।
4. लीची के बीज खाने नही चाहिए क्योंकि यह जहरीले होते है.
5. अंगूर के कुल उत्पादन का 71 प्रतिशत हिस्सा शराब बनाने में उपयोग किया जाता है.
6. सेब का तेल त्वचा के लिए बहुत ही लाभदायक है. यह त्वचा पर पड़ी झुर्रियां, टूटी त्वचा , खुजली और सूजन को दूर करता है.
7. केले थोड़े से रेडियोधर्मी भी होते है।
8. दवाई लेने के बाद अंगूर खाने से आपकी मौत भी हो सकती है।
9.यदि आप अंगूरो को माइक्रोवेव में रखते है तो यह फट जाएगें
।10. सेब पानी में तैरने लगते है क्योंकि उनमें 25 प्रतीशत हवा होती है।
11. अगर आप को किसी चीज से ईर्ष्या(जलन) है तो अगर आप केले खाए तो यह कम हो सकती है. क्योंकि इन में एक प्राक्रितक अम्ल(तेजाब) होता है जो कि हमारे शरीर के अंदर जाकर इसके प्रभाव को कम करता है.
12. सेब लगभग 7,000 प्रकार के होते है.
13. आम दुनिया में सबसे पसंद किया जाने वाला फल है. इसे फलों का राजा कहते है और यह भारत का राष्ट्रीय फल है.
14. स्ट्रॉबेरी और काजू एकलौते ऐसे फल है जिनके बीज फल के बाहर होते है जबकि अन्य फलों के अंदर होते है.
15. कई सालों पहले खोजकर्ता लंबे अभियानों पर पानी ले जाने के निए तरबूज का उपयोग करते थे.
16. क्या आपको पता है कि केला पानी में तैर सकता है।
17. केलों को कच्चा तोड़ने के बाद रसायनिक तरीको से पकाया जा सकता है जबकि अंगूरों को नही।
18. जापानी किसानो द्वारा “वर्गाकार तरबूज” उगाए जाते है ताकि इन्हें आसानी से स्टोर किया जा सके।
19. अगर किसी पेड़ पर लगे अनानास को उल्टा कर दिया जाए तो यह जल्दी पक जाता है.
20. टमाटर में मनुष्य से ज्यादा जीन्स पाए जाते है।
21. मनुष्य के “DNA” का 50% हिस्सा केले के साथ मिलता जुलता है।
22. नींबू सफाई करने के लिए सबसे उपयुक्त फल है क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में ऐसा तेजाब पाया जाता है जो कि बैक्टीरिया को मार देता है
23. आप नाशपाती के छिल्के के साथ फर्नीचर बना सकते है क्योंकि यह बहुत सख्त होता है.
24. “Coffee” पीने की तुलना में सेब खाने से अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
25. कुछ वैज्ञानिक मानते है कि केला धरती का पहला फल है.
26. गोभी में भी तरबूज के जितना ही पानी होता है. तरबूज में 92 प्रतिशत जबकि गोभी और गाजर में क्रमश 90 प्रतिशत और 87 प्रतिशत होता है.
27. आप मूंगफली के तेल द्वारा नाईट्रोग्लिसरीन तैयार कर सकते है जो कि बारूद का एक मुख्य हिस्सा होता है.
28. एक सुखे फल में ताजा फल से ज्यादा कैलोरी होती है क्योंकि सुखे फल से पानी की मात्रा बाहर निकल जाती है.
29. अनानास वास्तव में एक बड़े आकार का बेर है।
30. स्ट्राबेरी में संतरे से भी अधिक “Vitamin C” पाया जाता है।
31. लाल फल आप के दिल को मजबूत रखने में सहायक होते है.
32. अध्ययनों के बाद पता चला है कि रोज सुबह अंगूर खाने से वजन 1.5 किलो तक कम हो सकता है. यह मधुमेह से भी बचाव करता है.
33. संतरी फल आपकी ऑखों को, पीले फल सही तापमान को बरकरार और हरे फल आप की हड्डियो और दांतों को स्वस्थ रखते है. नीले और बैंगनी रंग के फल याददाश्त को अच्छा रखते है. Like & share

28/04/2016

जैविक कृषि का अर्थ है पंचतत्वों से हे।
👇🏻👇🏻👇🏻
केंचुए धरती के नीचे घूमकर मिट्टी को ताजी हवा से पुष्ट कर देत हैं, पर रासायनिक खाद ने उनका जीना कठिन कर दिया है। जुताई, बिजाई और गुड़ाई करने वाली दानवाकार मशीनों के लम्बे और गहरे फल इन केंचुओं को ही कुचल देते हैं। गोवंश जितनी बड़ी संख्या में हर दिन कट रहा है, उससे लगता है कि भविष्य में खेती किसान नहीं, मशीन और उद्योगपति ही करेंगे।
किसान मां समझकर धरती से प्रेम करता है, पर मशीन और उद्योगपति के लिए ये भावनाएं अर्थहीन हैं। इसलिए खेती जैविक हो या रासायनिकय खाद और बीज स्वदेशी हो या विदेशी, उन्हें अधिक उत्पादन से मतलब है। इससे ही प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।
यदि हर किसान अपने खेत के दस प्रतिशत भाग में जैविक खेती ही करे, तो इसके सुपरिणाम सबकी आंखें खोल देंगे। कृषि वैज्ञानिक भी यह मान रहे हैं कि आज नहीं तो कल, जैविक खेती की ओर लौटना ही होगा। क्योंकि यह हमारे ही नहीं, पूरे संसार और सृष्टि की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है, पर खतरा ये है कि हमारी आंख खुलने तक चिडि़यां कहीं पूरा खेत ही न चुग जाये।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻

28/04/2016

किसान अगर अपने खेत में कुछ इस तरह के काम या प्रयोग को कुछ अलग करने की प्रेरणा से करे तो अपने संसाधनों का बेहतरीन इस्तमाल करके नए आय के स्रोत बना सकता है।
मोती का उत्पादन
प्राकृतिक मोती की उत्पत्ति प्राकृतिक ढंग से होती है। वराह मिहिर की बृहत्संहिता में बताया गया है कि प्राकृतिक मोती की उत्पत्ति सीप, सर्प के मस्तक, मछली, सुअर तथा हाथी एवं बांस से होती है। परंतु अधिकांश प्राचीन भारतीय विद्वानों ने मोती की उत्पत्ति सीप से ही बताई है। प्राचीन भारतीय विद्वानों का मत था कि जब स्वाति नक्षत्र के दौरान वर्षा की बूंदें सीप में पड़ती हैं तो मोती का निर्माण होता है। यह कथन आधुनिक वैज्ञानिकों द्वारा भी कुछ हद तक सही पाया गया है। आधुनिक वैज्ञानिकों का भी मत है कि मोती निर्माण हेतु शरद ऋतु सर्वाधिक अनुकूल है। इसी ऋतु में स्वाति नक्षत्र का आगमन होता है। इस ऋतु के दौरान जब वर्षा की बूंद या बालू का कण किसी सीप के अंदर घुस जाता है तो सीप उस बाहरी पदार्थ के प्रतिकाल हेतु नैकर का स्राव करती है। यह नैकर उस कण के ऊपर परत दर परत चढ़ता जाता है और मोती का रूप लेता है।
वैश्विक स्तर पर मोती की खेती
कृत्रिम मोती को संवर्धित (कल्चर्ड) मोती भी कहा जाता है। इस मोती के उत्पादन की प्रक्रिया को मोती की खेती का नाम दिया गया है। उपलब्ध साक्ष्यों से पता चलता है कि मोती की खेती सर्वप्रथम चीन में शुरू की गई थी। ईसा बाद 13वीं शताब्दी में चीन के हू चाऊ नामक नगर के एक निवासी चिन यांग ने गौर किया कि मीठे पानी में रहने वाले सीपी में यदि कोई बाहरी कण प्रविष्ट करा दिया जाए तो मोती-निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस जानकारी ने उन्हें मोती की खेती शुरू करने हेतु प्रेरित किया। इस विधि में सर्वप्रथम एक सीपी ली जाती है तथा उसमें कोई बाहरी कण प्रविष्ट करा दिया जाता है। फिर उस सीपी को वापस उसके स्थान पर रख दिया जाता है। उसके बाद उस सीपी में मोती निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
मोती की खेती-भारत के संदर्भ में
भारत में मन्नार की खाड़ी में मोती की खेती का काम सन् 1961 में शुरू किया गया था। इस दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केन्द्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों का प्रयास काफी प्रशंसनीय रहा। इन वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीक से मत्स्य पालन हेतु बनाए गए तालाबों में भी मोती पैदा किया जा सकता है। हमारे देश में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह एवं लक्षद्वीप के क्षेत्र मोती उत्पादन हेतु काफी अनुकूल पाए गए हैं।
मोती की खेती-विभिन्न चरण
मोती की खेती एक कठिन काम है। इसमें विशेष हुनर की आवश्यकता पड़ती है। सर्वप्रथम उच्च कोटि की सीप ली जाती है। ऐसी सीपों में शामिल है। समुद्री ऑयस्टर पिंकटाडा मैक्सिमा तथा पिकटाडा मारगराटिफेटा इत्यादि। समुद्री ऑयटर काफी बड़े होते हैं तथा इनसे बड़े आकार के मोती तैयार किए जाते है। पिकटाडा मैक्सिमा से तैयार किए गए मोती दो सेंटीमीटर तक व्यास के होते हैं। पिकटाडा मारगराटिफेटा से तैयार किए गए मोती काले रंग के होते हैं जो सबसे महंगे बिकते हैं।
मोती की खेती हेतु सीपी का चुनाव कर लेने के बाद प्रत्येक सीपी में छोटी सी शल्य क्रिया करनी पड़ती है। इस शल्य क्रिया के बाद सीपी के भीतर एक छोटा सा नाभिक तथा मैटल ऊतक रखा जाता है। इसके बाद सीप को इस प्रकार बन्द कर दिया जाता है कि उसकी सभी जैविक क्रियाएं पूर्ववत चलती रहें। मैटल ऊतक से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है तथा अन्त में मोती का रूप लेता है। कुछ दिनों के बाद सीप को चीर कर मोती निकाल लिया जाता है। मोती निकाल लेने के बाद सीप प्राय: बेकार हो जाता है तथा उसे फेंक दिया जाता है। मोती की खेती के लिए सबसे अनुकूल मौसम है शरद ऋतु या जाड़े की ऋतु। इस दृष्टिकोण से अक्टूबर से दिसंबर तक का समय आदर्श माना जाता है।
🙏

Please share...
27/04/2016

Please share...

Address

Gill Road
Ludhiana
141003

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Khushal Kheti Khushal Kissan खुशाल खेती खुशाल किसान posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share