28/02/2025
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अपने जरवल रोड के Dr. Sudheer Shukla Sudheer Shukla जी का रिसर्च हिंदुस्तान अखबार (लखनऊ) में प्रकाशित हुआ है!! आपको बधाई 🎉
हिंदुस्तान न्यूज पेपर (लखनऊ) पेज नंबर 4
#खबर:
बैठे-बैठे बढ़ रही तोंद, ऑफिस वर्कर्स में मोटापे का बढ़ता खतरा: अध्ययन
लंबे समय तक बैठकर काम करना भारत में मोटापे की बड़ी वजह बनता जा रहा है। बीएमसी पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, डेस्क जॉब करने वालों में पेट की चर्बी (एब्डॉमिनल ओबेसिटी) बढ़ने की संभावना 8 से 20 प्रतिशत अधिक होती है। यह मोटापा मधुमेह, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
यह अध्ययन डॉ. निशिकांत सिंह और डॉ. सुधीर शुक्ला (हेल्थ सिस्टम्स ट्रांसफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म) द्वारा किया गया है, जिसमें डॉ. नवीन सिंह (केजीएमयू, लखनऊ) और ऋतुपर्णा सेनगुप्ता ने सहयोग दिया है।
सेवा क्षेत्र की ओर बढ़ता भारत:
अध्ययन में बताया गया है कि 57% कामकाजी महिलाएं और 58% पुरुष जो बैठकर काम करने वाले पेशों में हैं, वे पेट की चर्बी के शिकार हो रहे हैं। खासकर शहरी जीवनशैली, जंक फूड, शराब का सेवन और बढ़ती आय मोटापे को और बढ़ावा दे रही है।
कामकाज का तरीका बदलना जरूरी:
विशेषज्ञों का कहना है कि नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) का बढ़ता खतरा भारत के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। डॉ. सिंह और डॉ. शुक्ल के अनुसार "कार्यालयों में स्वास्थ्य अनुकूल माहौल तैयार करना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत है,"। "ऑफिस में स्टैंडिंग डेस्क, बीच-बीच में फिजिकल एक्टिविटी ब्रेक और कर्मचारियों को चलने-फिरने के लिए प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी हो गया है।"
क्या किया जाना चाहिए?
अध्ययन में कार्यस्थलों को अधिक सक्रिय बनाने, सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और प्रोसेस्ड फूड की खपत पर नियंत्रण की सिफारिश की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो मोटापे से जुड़ी बीमारियां भारत की पहले से बोझिल स्वास्थ्य व्यवस्था पर और दबाव डाल सकती हैं।
अब समय आ गया है कि भारतीय वर्कफोर्स अपने कामकाज के तरीके में बदलाव लाए, वरना मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल बन सकता है।
रिसर्च का लिंक: https://bmcpublichealth.biomedcentral.com/articles/10.1186/s12889-025-21956-5