28/05/2026
यह लेख स्पष्ट करता है कि कैसे वे अर्थशास्त्री और विश्लेषक, जो पहले मोदी सरकार की नीतियों का बचाव करते थे, अब आर्थिक मोर्चे पर चिंता जता रहे हैं।
लेख का मुख्य सार और प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
1. विशेषज्ञों के रुख में बदलाव
सुरजीत भल्ला: पूर्व आर्थिक सलाहकार, जो पहले मोदी सरकार के कट्टर समर्थक थे, अब खुलकर कह रहे हैं कि "बीजेपी चुनाव जीत रही है, लेकिन अर्थव्यवस्था हार रही है।" उन्होंने इसे 'आर्थिक अव्यवस्था' बताया है।
अरविंद सुब्रमण्यम: पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नेतृत्व में 'स्पष्टता' और 'निर्णय लेने की क्षमता' की कमी की आलोचना की है।
संजय बारू: मनमोहन सिंह के पूर्व सलाहकार का कहना है कि 1991 और 2004 के विपरीत, आज का कारोबारी जगत और मीडिया सरकार की आलोचना करने से डरता है, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है।
2. भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख चिंताएं
मुद्रा में गिरावट: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार सात वर्षों से गिर रहा है और 2025 में एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा।
निजी निवेश में कमी: 2000 के शुरुआती वर्षों की तुलना में निजी कॉर्पोरेट निवेश लगभग आधा रह गया है।
वृद्धि दर का भ्रम: लेख में तर्क दिया गया है कि भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था का टैग खो चुका है। प्रति व्यक्ति आय वृद्धि के मामले में भारत बांग्लादेश और इथियोपिया जैसे देशों से काफी पीछे है।
लक्ष्यों से पीछे: भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के अपने घोषित लक्ष्यों को समय पर हासिल नहीं कर पाया है और वर्तमान में इसका आकार 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब है।
3. आलोचना का मूल कारण
लेख के अनुसार, समस्या केवल सुधारों की कमी नहीं है, बल्कि सरकार की 'ग़लत प्रवृत्तियों' की है, जैसे:
कुछ चुनिंदा बड़े कॉर्पोरेट घरानों को प्राथमिकता देना।
संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल।
टैक्स कानूनों का आक्रामक और मनमाना कार्यान्वयन।
निर्णय प्रक्रिया में 'खामोशी' और 'दिशाहीनता'।
निष्कर्ष:
लेख का केंद्रीय संदेश यह है कि आर्थिक चुनौतियां अब गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल और अधिक सुधार करने के बजाय, सरकार को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव (नेतृत्व और नीतिगत दृष्टिकोण में) लाने की तत्काल आवश्यकता है ताकि निवेशकों का विश्वास फिर से बहाल हो सके।