15/10/2024
स्कूल में बच्चे स्टडी करना सीख्नते हैं और घर पर पेरेंट्स उसी सीखने को पक्का करते हैं वही ट्यूशन क्लास में दुबारा और स्टडी होती है.
देखना सीखने की जरूरत ही नहीं महसूस होती. न बच्चों को न पेरेंट्स को और स्कूल को तो बिलकुल भी नहीं..
अगर प्रबुद्ध अभिभावक ऐसी जरूरत के प्रति सवेंदशील हों , तो सोचें की "देखना" कैसे सीखा जाये ? क्या सीमाएं हैं ; क्या टूल्स हैं ; और भी बहुत कुछ.
हमारे माने तो यह एक अत्यंत आवश्यक जीवन कौशल है जिसकी जरूरत बच्चों और अभिभावकों दोनों को ही है.
One can only see what one observes, and one observes only things which are already in the mind.