15/11/2023
रोहित शर्मा विराट कोहली
The song of Ice and Fire
जब सचिन ने कई साल पहले अपना रिकॉर्ड तोड़ने के लिए इन दोनो का नाम लिया था तब किसी को न तो सचिन पर शक था, ना ही विराट और रोहित की हैसियत पर। लेकिन क्रिकेट इतना क्रूर खेल है कि यहां आपको हर गेंद पर खुद को साबित करना पड़ता है। ये पहली बार नही था कि क्रिकेट की दुनिया ने किन्ही दो खिलाड़ियों से भविष्य को संवारने निखारने की उम्मीद की हो। पर ये पहली बार हुआ है कि अलग अलग क्षमता वाले दो खिलाड़ी अलग रास्ते अपनाते हुए अपनी टीम को विजय की दिशा में लेकर गए हो। कहते है कि पुरखे बना कर चले जाते है, आने वाली नस्ले को संभाल नही पाती । आज ही के दिन जब सचिन आखिरी दफा बैटिंग करने उतरे थे तो भारतीय क्रिकेट का एक स्वर्णिम दौर खत्म हुआ था, जिस दौर की रंगत संवारने में सचिन के अलावा द्रविड़, गांगुली, लक्ष्मण, सहवाग जैसे लोगो का खून पसीना लगा हुआ था। रोहित शर्मा के बारे में कहते है की उनकी तरफ गेंद अन्य बल्लेबाजों के मुकाबले धीमी गति से आती है, रोहित के पास गेंद खेलने के लिए सेकंड का कुछ हिस्सा ज्यादा होता है। विराट को मेहनत करके उस सेकंड के हिस्से के फासले को लांघना था इसलिए विराट फिटनेस की ओर भागे तो रोहित लंबी और बड़ी पारियां खेलने लगे सिर्फ अपने टैलेंट की बदौलत। कभी ये कहा गया कि कोहली रोहित की तरह छक्के क्यू नही मार पाता, तो कभी ये सवाल हुआ कि रोहित कोहली की तरह तीन रन क्यू नही भाग पाता। पर दोनो ने किसी की नही सुनी, एक छक्के मारता रहा, एक रन भागता रहा दोनो का मकसद एक था कि पुरखो की बनाई विरासत न बिखरने पाए। जब कोहली कप्तान थे तो रोहित के पीछे चट्टान की तरह खड़े रहे, और जब कोहली का बुरा दौर आया तो रोहित एक भाई की तरह कोहली पर उठने वाले हर सवाल को अपने सीने पर लेते रहे।।
क्रिकेट के इन दो नगीनों के करियर में वो दौर भी आया जब ये कुछ कदम, कुछ इंच से लड़खड़ा कर गिरे, दुनिया हंसी, ताने मारती रही, और ये दोनो अपनी आईसीसी टूर्नामेंट की असफलता का दुख लिए रेंगते रहे चलते रहे। इस वर्ल्ड कप में जिस तरह से दोनो ने अपना अपना आग और बर्फ का रोल निभाया है वो काबिले तारीफ है। रोहित और विराट भारतीय क्रिकेट के लिए किसी वरदान की तरह है, जो स्वभाव और शैली से विपरीत है पर खेल के प्रति समर्पण और प्रेम एक जैसा है। शुरू के दस ओवरों में रोहित ध्यान रखते है कि कोहली को एक कंफर्ट सिचुएशन मिले खेलने के लिए, तो मिडिल ओवर में कोहली ध्यान रखते है कि एक इंसान जो बिना रिकॉर्ड और माइल्ड स्टोन का सोचे अपना सब कुछ झोंक रहा है, उसका प्रयास बेकार न जाए, उसकी मेहनत की मजदूरी फिर से कोई 45 मिनट की खराब क्रिकेट ना लूट ले। आज कोहली सचिन से आगे निकल गए है, बहुत खुश हूं, पर मुझे 81 शतक दिखते है, जो इन दोनो ने मिलकर बनाए है, और मैं चाहता हूं रोहित इतना लंबा खेले की दोनो मिलकर सौ शतक बनाया। जो लोग विराट और रोहित की तुलना करते है, या एक का इस्तेमाल दूसरे को नीचा दिखाने के लिए करते है, वो न क्रिकेट के फैन है न विराट के न रोहित के। ये दौर विराट और रोहित का दौर है, दोनो एक दूसरे के पूरक है। दोनों हमारे घर के होनहार, मेहनती और काबिल खिलाड़ी है, जो अपने पुरखों की बनाई इज्जत की लाज रख रहे है। क्रिकेट में ये दोनो हमेशा याद रखे जाएंगे कि एक आग था, दूसरी ठंडी बर्फ, और दोनो खाल जला देते थे सामने वाली टीम की।।